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Four Vedas (चारों वेद )

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Four Vedas (चारों वेद )

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"वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है. वेद का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है." (महर्षि दयानन्द सरस्वती)



चारों वेद (14 volumes )


भाष्यकार: पण्डित हरिशरण सिद्धान्तालंकार


प्रकाशक: श्री गूढ़मल प्रह्लाद्कुमार आर्य धर्मार्थ न्यास

Description

Details

दिव्य ज्ञान वेद प्रभु वाणी है. इस का विस्तार कर मानव जीवन में सुख, शान्ति व ऐश्वर्य वृद्धि का प्रयास करने वाले ही परमपिता परमात्मा को प्रिय होते हैं. पण्डित हरिशरण सिद्धान्तालंकार ईश्वर के एक ऐसे ही प्रिय पुत्र थे. आजीवन ब्रह्मचारी रहकर उन्होंने निरंतर वेदों का स्वाध्याय किया और इससे अर्जित ज्ञान को वाणी व लेखनी से जन-जन तक पहुँचाया.

पण्डित हरिशरण सिद्धान्तालंकार ने स्वामी दयानन्द सरस्वती जी की निर्दिष्ट पद्धति के अनुसार वेद भाष्य किया है. वह निरुक्त एवं व्याकरण के अप्रतिम विद्वान थे. वेद मन्त्रों की शास्त्रीय दृष्टि से व्याख्या करने तथा संगति लगाने में उनकी प्रतिभा अपूर्व थी. व्याकरण, धातु पाठ से युक्त उनका यह भाष्य जहाँ उद्भट विद्वानों के लिए विचार विमर्श की सामग्री प्रस्तुत करता है, वहीँ सामान्य पाठक के लिए यह अत्यन्त प्रेरणादायक, रोचक, सरल, सुबोध एवं सहज में हृदयंगम हो जाने वाला है.

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